’’कल्पसूत्र’ देव,गुरु व धर्म के प्रति श्रद्धा व विश्वास तथा माता-पिता की सेवा का संदेश देता है- गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर म.सा.
08/22/2025
का उपासरा ट्रस्ट, राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान व राज्य अभिलेखागार में स्वर्ण स्याही से लिखित व चित्रित लगभग एक हजार वर्ष से अधिक प्राचीन कल्पसूत्र की पुस्तकें मौजूद है। कल्पसूत्र एक महत्वपूर्ण जैन ग्रंथ है जिसमें भगवान महावीर स्वामी व पार्श्वनाथ भगवान की जीवनियां शामिल है। इसको भगवान महावीर स्वामी के मोक्ष के लगभग 980-या 993 वर्ष तथा भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष के लगभग 1230 वर्ष बाद लिखा गया था। मूल रूप से प्राकृत व संस्कृत में लिखित कल्पसूत्र का अंग्रेजी सहित विश्व की अनेक भाषाओं में अनुवाद किया गया है। गणिवर्य ने कहा कि पश्चिम भारत में इसका लेखन 14 शताब्दी में जैन संतों, उपाध्याय व आचार्यों ने किया था। कल्पसूत्र में भगवान महावीर स्वामी के नौ गणों, गौतम स्वामी सहित 11 गणधरों का उल्लेख है। प्रवचन स्थल पर आए श्रावक-श्राविकाओं का गणेश कुमार, दिनेश कुमार श्रीश्रीमाल चैन्नई की ओर से श्रीफल से अभिनंदन किया गया।
