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आगम साहित्य में संवत्सरी चार्तुमास के 49 या 50 दिन पुरे होने पर 69 या 70 दिन रहने पर मनाई जाती है

आगम साहित्य में संवत्सरी चार्तुमास के 49 या 50 दिन पुरे होने पर 69 या 70 दिन रहने पर मनाई जाती है

नागौर: काली पोल स्थित कनक आराधना भवन में विराजमान खरतरगच्छ जैन साध्वी प्रियंकराश्रीजी, प्रार्थनाश्रीजी, प्रतिभाश्रीजी, प्रिसुधाश्रीजी, प्रणम्यश्रीजी एवं प्रसिद्धिश्रीजी के पावन निश्रा में नगीना नगरी नागौर में खरतरगच्छ संघ में पयुर्षण महापर्व के आठवें दिन संवत्सरी पर्व हषोल्लास ओर उंमग के साथ में मनाया | खरतगरच्छ जैन साध्वी प्रिंयकराश्रीजी ने पयुर्षण महापर्व के आठवें दिन धर्मसभा को सम्बोधित करते करते हुए कहा कि आगम साहित्य में संवत्सरी चार्तुमास के 49 या 50 दिन पुरे होने पर 69 या 70 दिन रहने पर मनाई जाती है | खरतरगच्छ श्रीसंघ में भाद्र शुक्ल चतुर्थी के दिन संवत्सरी पर्व, पुर्व- त्याग प्रत्याख्यान,उपवास, पौषध, सामयिक, स्वाध्याय,ओर संयम से मनाया जाता हैं | वर्षभर में कभी भी समय नहीं निकालने वाले लोग भी इस दिन जागृत हो जातें हैं | ओर प्रतिष्ठान भी बंद रखते हैं | साध्वी ने बताया कि कभी उपवास,प्रभु दर्शन नहीं करने वाले भी इस दिन धर्मानुष्ठान करते नजर आते हैं | इस मौके पर साध्वियों द्वारा भद्र बाहु स्वामी रचित मूल बारसा सुत्र का प्राकृत भाषा में वाचन किया गया | साथ ही श्रद्धालुओं को इसके दर्शन कराए गए | कल्प सुत्र अर्थात बारसा सुत्र को जागृत तन मन से श्रवण करने से जन्म मरण के मूल कारण कषाय रूपी जहर उसी प्रकार उतर जाता है जैसे गारूडी़ मंत्र बोलने से सर्प का विष उतर जाता है |भद्राबाहु स्वामी ने कल्पसूत्र में लिखा था कि स्वयं को शीतल रखते हुए क्षमा मांगे व क्षमादान कर दूसरों को भी क्षमा करें। संवत्सरी के दिन मिच्छामि दुक्काड़म कर सच्चे भाव से प्रतिक्रमण करके क्षमा याचना पर्व की आराधना करनी चाहिए। संघ के प्रदीप डागा एवं भास्कर खजांची ने बताया कि गुरुवार को क्षमायाचना पर्व मनाया जायेगा | जिसमें समाज के लोग एक दूसरे के घर जाकर क्षमा मांगते हैं | 45 दिवसीय गुरु इकत्तीसा पाठ का रोजाना रात्रि को 8-30 बजे से 9-30 बजे पाठ चल रहा है | खरतगच्छ श्रीसंघ के द्वारा पयुर्षण महापर्व पर आठ दिन प्रतिक्रमण ओर भगवान की आंगी रचना करने पर बहुमान किया गया | केवलराज बच्छावत ने बताया कि पयुर्षण महापर्व पर कई प्रकार की तपस्याएं चल रही है जिसमें पौषध,अक्षयनिधि तप,समोसरण तप, तेला,विजय कषाय, अठ्ठाई तप, बच्छावत ने कहा कि इन श्रद्धालुओं ने जैन साध्वी प्रसिद्धिश्रीजी, सुरेन्द्र पारख, कल्प खजांची, पूजा लोढा, सृष्टि लोढ़ा, भाविका खजांची, हिमांशु खजांची, शोभा खजांची के आज लगातार आठवां उपवास है| बारसा सुत्र वाचन के बाद में जैन साध्वीयों के सानिध्य में गाजे बाजे के साथ में भव्य चैत्य परिपाटी निकाली गई जो कि शहर के श्वेताम्बर जैन मन्दिरों के दर्शन करते हुए वापस कनक आराधना भवन पहुंची| इस अवसर पर केवलराज बच्छावत, वर्धमानचंद, संदीप,संजय डागा,गोतम चंद बोथरा, प्रदीप बोथरा,मनोज खजांची, विमल चंद कोठारी, खेमचंद खजांची, निर्मल सुराणा,रोशन, हेमन्त,मोहित, रक्षित,हिमांशु बोथरा, कुशाल खजांची, अभिषेक,श्रेणिक डोसी, मनीष खजांची सहित समाज के स्त्री पुरूष एवं बच्चे चैत्य परिपाटी में मौजूद थे | हिरावाडी़ स्थित आदिनाथ जैन मंदिर में विकास बोथरा,प्रदीप डागा,कुशल खजांची एवं अंकित डाएगा के द्वारा भगवान आदिनाथ की आंगी रचना की गई | ईशा खजांची ने गवली बनाई ।विकास बोथरा एंव कुशल खजांची ने बताया कि पयुर्षण महावीरचंद बच्छावत परिवार वालों ने लिया |
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