आहार त्यागकर आत्मा के समीप जाना ही उपवास है - साध्वी प्रियंकरा श्री जी म.सा. तपस्वी कल्प खजांची
08/30/2025
आहार त्यागकर आत्मा के समीप जाना ही उपवास- जैन साध्वी प्रिंयकराश्रीजी
नागौर: काली पोल स्थित कनक आराधना भवन में विराजमान खरतरगच्छ जैन साध्वी प्रियंकराश्रीजी, प्रार्थनाश्रीजी, प्रतिभाश्रीजी, प्रिसुधाश्रीजी, प्रणम्यश्रीजी एवं प्रसिद्धिश्रीजी के पावन निश्रा में नगीना नगरी नागौर मे कल्प खजांची के 11 उपवास के उपलक्ष्य में गाजे बाजे एवं भगवान की सवारी के साथ में भास्कर मनोज खजांची के निवास स्थान हीरावाड़ी से सुबह 9 बजे वड़घोडा़ निकाला | जो कि हीरावाड़ी स्थित भगवान आदिनाथ जैन मंदिर, से होता हुआ कांच का जैन मंदिर काठडी़यों का चौक, दफ्तरीयों की गली स्थित चौसठीया जैन मंदिर, घोडावतों की पोल स्थित शांतिनाथ जैन मंदिर लोढ़ा की पोल, लोढ़ा का चौक डागावाडी़ से होता हुआ काली पोल स्थित कनक आराधना भवन पहुचां जहाँ पर पहले भगवान की आरती ओर मंगल दीपक किया गया |इसके बाद में खरतरगच्छ जैन साध्वी प्रिंयकराश्रीजी ने तप की महत्ता पर धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि बाह्य प्रवृत्तियों से निवृत होतें हुए आहार का त्याग कर आत्मा के समीप जाना उपवास हैं | उपाध्याय दशो विजयी कहते हैं कि विषय कयाष एवं आहार का त्याग करना उपवास हैं | नहीं तो उल्लंघन मात्र हैं | तप के साथ इन्द्रिय संयम एवं कषाय मुक्ति का लक्ष्य होना चाहिए | तभी हमारी तपस्या शुद्ध बनती हैं |
सभी समस्याओं का समाधान तपस्या ही हैं |
जैन साध्वी प्रार्थनाश्रीजी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में ऐसा कोई धर्म पंथ नहीं है | जिसमें तप का समावेश नहीं किया गया हो | तप धर्म तीर्थंकरों ने तप करके ही कर्मों की निर्जरा की हैं | तप धर्म का प्राण हैं तथा तप से ही धर्म आगे बढता हैं |
संघ के प्रदीप डागा एवं भास्कर खजांची ने बताया कि खरतरगच्छ जैन साध्वी प्रसिद्धिश्रीजी के 11 उपवास के उपलक्ष्य में कनक आराधना भवन में शनिवार दोपहर 1 बजे गांव ससांझी ( महिला गीत) का आयोजन रखा गया |
*इस मौके पर यह रहे मौजूद*
केवलराज बच्छावत, संजय डागा, पुखराज, सुनिल,कमल, कोठारी, खेमचंद,मनोज, बलवंत,सुनिल, कुशाल, खजांची, कुशल, विकास,रक्षित बोथरा, वद्धर्मान ,संजय, डागा, नवनिर्वाचित नगर परिषद के सभापति के प्रतिनिधि कपिल तोलावत सहित स्त्री पुरुष बच्चें मौजूद थें |
