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बिना अन्न जल रहे 63 दिन:- कन्हैयालाल जी ने 63 दिनों की चौविहार तपस्या की।

बिना अन्न जल रहे 63 दिन:- कन्हैयालाल जी ने 63 दिनों की चौविहार तपस्या की।

बीकानेर निवासी कन्हैयालाल जी भुगड़ी द्वारा 63 दिनों के तप की बहुत बहुत अनुमोदना -बिना अन्न जल रहे 63 दिन:- कन्हैयालाल जी ने 63 दिनों की चौविहार तपस्या की। चौविहार यानी जल भी ग्रहण नहीं करना। 63 दिनों में एक अन्न का दाना तो दूर, एक बूंद जल भी ग्रहण नहीं किया। भुगड़ी जी पिछले पांच वर्षों से घोर तपस्या कर रहे हैं। इससे पहले उपवास से अधिक कोई तपस्या नहीं की। पांच वर्ष पहले सर्वप्रथम 11 दिनों की तपस्या की। बस यहीं से तप की यात्रा शुरू हुई, जो निरंतर हर वर्ष जारी है। पहले वर्ष 11, दूसरे वर्ष 21, तीसरे वर्ष 31, चौथे वर्ष 51 व अब पांचवें वर्ष 63 की तपस्या की है। ऐसे होता है ये कठिन तप: जैन धर्म का एक उपवास करीब 36 घंटों का होता है। जैसे कल शनिवार का उपवास करना है तो शुक्रवार की रात 12 बजे से अन्न जल का त्याग हो जाएगा। इसके बाद सीधे रविवार के सूर्योदय के 48 मिनट बाद ही पारणा किया जाएगा। यह चौविहार उपवास की प्रक्रिया है, जबकि तिविहार उपवास में सूर्य की साक्षी में निर्दोष जल लिया जा सकता है।
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