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भीम (राजसमंद) राजस्थान हाल बैंगलोर निवासी उच्च व्यवसायी एक दक परिवार के सभी सदस्य पति-पत्नी और पुत्री चले राग-द्वेष छोड़ जैन दीक्षा के मार्ग पर...*

भीम (राजसमंद) राजस्थान हाल बैंगलोर निवासी उच्च व्यवसायी एक दक परिवार के सभी सदस्य पति-पत्नी और पुत्री चले राग-द्वेष छोड़ जैन दीक्षा के मार्ग पर...*

*भीम (राजसमंद) राजस्थान हाल बैंगलोर निवासी उच्च व्यवसायी एक दक परिवार के सभी सदस्य पति-पत्नी और पुत्री चले राग-द्वेष छोड़ जैन दीक्षा के मार्ग पर...* *पत्रकार सिद्धार्थ जैन* *ब्यावर (राजस्थान)* *094139 48333* *श्री अ.भा. साधुमार्गी जैन संघ आचार्य श्री रामलाल जी म.सा. के सानिध्य में भीम (राजसमंद) का एक पूरा ही परिवार पति-पत्नी-बेटी दीक्षित होने जा रहा हैं. ये खुद अपने पिता व दो भाइयों के परिवार साथ बैंगलोर (कर्नाटक) में व्यवसाय में मजबूती से स्थापित है. दीक्षार्थी के पिता का भरा-पूरा सरसब्ज़ कुटुम्ब है. पिता सहित कुल छह भाई है.* *छह भाइयों में सबसे बड़े मुखिया श्री भेरूलाल जी दक भीम निवास कर रहे हैं. इनके छोटे भाई श्री तेजमल जी दक स्व. श्रीमती कान्ता जी के (बैंगलोर) तीन में से एक पुत्र प्रवीण (42) अपनी धर्मपत्नी प्रीति (40) और एकमात्र पुत्री ताशवी (13) के साथ दीक्षा ले रहे हैं. आचार्यश्री नानालाल जी मा.सा. के पट्टधर शिष्य आचार्यश्री रामलाल जी म.सा. देशनोक (बीकानेर) में 3 नवम्बर को दीक्षित करेंगे. उस दिन कुल पन्द्रह दीक्षा सम्पन्न होगी.* *दादा अपनी लाड़ली पौत्री को दीक्षित होते हुए देखने का साहस बटोर नही पा रहे हैं! दादा 'भावविह्वल' है वही पौत्री दीक्षा के लिए 'अटल' है! दादा इस मंगल,ऐतिहासिक और मर्मस्पर्शी समारोह के प्रत्यक्षदर्शी होंगे अथवा नही, अभी तक संशय बना हुआ है! इनके अतिरिक्त सभी भाइयों के परिवार,कुटुम्बजन,रिश्तेदार मंगलमय अवसर पर मौजूद रहेंगे. दीक्षा के साक्षी बनेंगे.* *देखिए ये भी कैसा संयोग है! दीक्षा ले रही प्रीति का मायका भी भीम ही है. श्रीमती सुशीला जी श्री कैलाश जी गुरलिया की एकमात्र पुत्री है प्रीति. य़ह परिवार भी इन्ही आचार्यश्री के भक्तों में समाहित समर्पित है. परिवार समर्थ,सक्षम,सरसब्ज़ है. गुरलिया परिवार-परिजनों की भी इस पावन अवसर पर देशनोक में मौजूदगी रहेगी. दीक्षा प्रसंग को देखते हुए उक्त तिथि पर "साधुमार्गी जैन संघ, बैंगलोर मेंबर्स की बुकिंग से बैंगलोर-जैसलमेर फ्लाईट फुल हो गई.* *भीम से अगर देखे इन नवीन दीक्षाओ के बाद यहां से छह दीक्षित हो जायेंगे. सबसे पहले गोदाजी गाँव (भीम) से श्री धर्मेश मुनि जी आचार्यश्री नानालाल जी मा.सा. से दीक्षित हुए. यो ये वर्तमान आचार्य से भी सीनियर थे. इनकी धर्मसहायिका जयश्री जी भी दीक्षित हुई. बाद में विशिष्ट श्रावक श्री छगनलाल जी गन्ना की पुत्री भी दीक्षित हुई. भावनाश्री जी. अब एक साथ तीन...पिता के एक पुत्र का पूरा ही परिवार! इनमें भी एक छोटी सी बेटी! ग़ज़ब, अद्भुत, अविस्मरणीय...*
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