साइकिल से डिटर्जेंट बेचने से लेकर अरबपति बनने तक का सफर: कारसनभाई पटेल की अरबपति बनने की कहानी: जिस व्यक्ति ने ‘निरमा’ को घर-घर तक पहुँचाया
11/09/2025
साइकिल से डिटर्जेंट बेचने से लेकर अरबपति बनने तक का सफर: कारसनभाई पटेल की अरबपति बनने की कहानी: जिस व्यक्ति ने ‘निरमा’ को घर-घर तक पहुँचाया
कारसनभाई पटेल की कहानी मेहनत, नवाचार और अटूट उद्यमशीलता की मिसाल है। 1945 में गुजरात के रूपपुर गाँव में एक साधारण परिवार में जन्मे पटेल ने भारत के डिटर्जेंट उद्योग को नई दिशा दी। उन्होंने रसायन विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और अहमदाबाद के न्यू कॉटन मिल्स व बाद में गुजरात जियोलॉजी और माइनिंग विभाग में नौकरी की। स्थायी सरकारी नौकरी होने के बावजूद, उनका सपना कुछ बड़ा करने का था।
1969 में उन्होंने अपने घर के पिछले हिस्से में मात्र ₹15,000 के छोटे कर्ज से सस्ता डिटर्जेंट बनाना शुरू किया और खुद साइकिल पर बैठकर “निरमा” के पैकेट बेचे। उस समय महंगे डिटर्जेंट आम लोगों की पहुंच से बाहर थे, इसलिए ₹13 प्रति किलो का “निरमा” तुरंत लोकप्रिय हो गया। बढ़ती मांग के चलते पटेल ने छोटा कारखाना किराए पर लिया और बाद में साबुन व अन्य उत्पादों तक विस्तार किया।
“निरमा” नाम उन्होंने अपनी दिवंगत बेटी निरूपमा के नाम पर रखा और उसकी तस्वीर ब्रांड के विज्ञापनों में शामिल की। आज निरमा लिमिटेड में 18,000 से अधिक कर्मचारी हैं और इसका वार्षिक राजस्व ₹7,000 करोड़ से भी ज्यादा है, जबकि पूरे निरमा समूह का टर्नओवर ₹23,000 करोड़ से अधिक है। 2023 तक कारसनभाई पटेल की संपत्ति लगभग 4 अरब डॉलर आँकी गई।
साइकिल से शुरुआत कर अरबपति बनने तक का उनका सफर सच्ची प्रेरणा है।
